प्रस्तावना: एक नई सुबह का आगाज़
26 जनवरी 2026 की यह सुबह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) और उसकी सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) का एक वैश्विक घोषणापत्र थी। जब कर्तव्य पथ पर शंख की पावन ध्वनि के साथ ‘वंदे मातरम’ के 150वें गौरवशाली वर्ष का उद्घोष हुआ और साथ ही आसमान में हाइपरसोनिक मिसाइलों की गर्जना सुनाई दी, तो दुनिया ने एक नए भारत का उदय देखा। 77वें गणतंत्र दिवस की यह परेड ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शौर्य और ‘विकसित भारत’ के संकल्प का एक ऐसा अद्भुत तालमेल थी, जिसने आधुनिकता और परंपरा के बीच की दूरी को मिटा दिया। आज के इस विश्लेषण में, हम उन 5 महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करेंगे जिन्होंने वैश्विक समुदाय को हतप्रभ कर दिया।
टेकअवे 1: सेना के ‘मौन योद्धा’—हाई-एल्टीट्यूड वॉरफेयर का जीवंत प्रदर्शन
इस वर्ष की परेड का सबसे संवेदनशील और रणनीतिक हिस्सा वह था, जब पहली बार भारतीय सेना की ‘पशु टुकड़ी’ ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। एक रणनीतिकार के रूप में, यह देखना महत्वपूर्ण है कि ड्रोन और एआई के दौर में भी भारत ने दुर्गम सीमाओं पर अपने इन वफादार साथियों की भूमिका को वैश्विक मंच पर स्वीकार किया है।
- दल की संरचना: इस विशेष टुकड़ी में दो कूबड़ वाले बैक्टीरियन ऊंट, चार जांस्कर खच्चर (म्यूल्स), और चार शिकारी पक्षी (बाज और काइट्स) शामिल थे। इनके साथ ही 10 भारतीय नस्ल के मुधोल हाउंड और वर्तमान सेवा में तैनात 6 पारंपरिक सैन्य डॉग्स ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
- सामरिक महत्व: ये ‘मौन योद्धा’ मुख्य रूप से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) जैसे क्षेत्रों में तैनात रहते हैं, जहाँ तापमान -30°C तक गिर जाता है। यह प्रदर्शन दुनिया को भारत की हाई-एल्टीट्यूड वॉरफेयर (High Altitude Warfare) क्षमताओं की याद दिलाता है, जहाँ ये पक्षी दुश्मन के ड्रोन्स को बेअसर करने और ये पशु रसद पहुँचाने में सक्षम हैं।
“ये बेज़ुबान साथी भारतीय सेना के मौन योद्धा हैं, जो आधुनिक तकनीक की सीमाओं के पार, देश की दुर्गम सीमाओं की रक्षा करते हैं।”

टेकअवे 2: कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक—यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक जुड़ाव
77वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने अपनी ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ का परिचय देते हुए यूरोपीय संघ (EU) के साथ संबंधों का एक नया अध्याय लिखा। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति ने भारत-यूरोपीय संबंधों को नई ऊंचाई दी।
- पहली बार विदेशी दस्ता: इस परेड की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत यह थी कि पहली बार यूरोपीय संघ का एक दस्ता (EU Contingent) भारतीय सैनिकों के साथ कर्तव्य पथ पर कदमताल करता नजर आया।
- मदर ऑफ ऑल डील्स: यह आयोजन भारत और 27 देशों के संगठन EU के बीच होने वाले उस ‘ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ की प्रस्तावना है, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। इससे भारत की पहुँच फ्रांस, जर्मनी और स्पेन जैसे विशाल बाजारों तक सुगम होगी।
उर्सुला वॉन डेर लेयन ने भारत की वैश्विक भूमिका पर कहा, “एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है, और इससे हम सभी को लाभ होता है।”
टेकअवे 3: ऑपरेशन सिंदूर और स्वदेशी मारक क्षमता का प्रकटीकरण
रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा सबूत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम थी। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के प्रति भारत की कड़ी और निर्णायक प्रतिक्रिया की याद में मनाया गया, जो हमारी सैन्य दृढ़ता का प्रतीक है।
- अजेय मारक क्षमता: परेड में पहली बार ‘भैरव लाइट कमांडो बटालियन’ और ‘शक्तिबाण रेजिमेंट’ जैसी नई यूनिट्स ने हिस्सा लिया। साथ ही, ‘सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर’ और ‘भैरव अनमैंड ग्राउंड व्हीकल (UGV)’ ने भारत की भविष्य के युद्धों के लिए तैयारी को प्रदर्शित किया।
- तकनीकी श्रेष्ठता: भारत ने पहली बार अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल का नेवल वर्जन प्रदर्शित कर दुनिया को अपनी सामरिक बढ़त का अहसास कराया। ‘ड्रोन शक्ति’ और ‘इंटीग्रेटेड ऑपरेशन सेंटर’ का प्रदर्शन यह बताता है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है।
टेकअवे 4: कर्तव्य पथ पर ‘भारत गाथा’—सभ्यतागत यात्रा का डिजिटल विजन
सांस्कृतिक इतिहासकार के दृष्टिकोण से, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की झांकी इस बार की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। मशहूर फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली के विजन ने भारत की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को एआई (AI) के भविष्य से जोड़ दिया।
- थीम: “भारत गाथा: श्रुति, कृति, दृष्टि”: यह झांकी भारत की सभ्यतागत यात्रा (Civilizational Journey) का प्रतिबिंब थी।
- श्रुति: प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा और मौखिक ज्ञान का प्रतिनिधित्व।
- कृति: लिखित ज्ञान का युग, जहाँ भगवान गणेश को महाभारत लिखते दिखाया गया।
- दृष्टि: सिनेमा, डिजिटल मीडिया और एआई (AI) का आधुनिक दौर।
- ग्लोबल कंटेंट हब: यह प्रस्तुति भारत को एक ‘ग्लोबल कंटेंट हब’ के रूप में स्थापित करने के सरकार के लक्ष्य को दर्शाती है, जिसे ‘वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (WAVES)’ के माध्यम से गति दी जा रही है। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल का गौरव इस पूरी झांकी के केंद्र में रचा-बसा था।
टेकअवे 5: आसमान में शौर्य और अंतरिक्ष की असीम आकांक्षाएं
परेड का अंतिम चरण भारत की हवाई शक्ति और अंतरिक्ष में बढ़ते कद को समर्पित था।
- फ्लाईपास्ट: राफेल, सु-30 MKI और C-295 जैसे 29 विमानों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर फॉर्मेशन’ में उड़ान भरकर आसमान को तिरंगे के रंग में रंग दिया।
- अंतरिक्ष के सितारे: गूगल डूडल ने भी इस वर्ष इसरो (ISRO) की चंद्रयान, आदित्य-L1 और गगनयान जैसी महात्वाकांक्षी यात्राओं को सम्मानित किया।
- अशोक चक्र: इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति ने गगनयान के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया, जो विज्ञान और शौर्य के संगम का सबसे बड़ा सम्मान है।
निष्कर्ष: भविष्य की ओर एक दृढ़ कदम
2026 का यह गणतंत्र दिवस केवल 77वें साल का जश्न नहीं था, बल्कि यह 150 साल पुराने ‘वंदे मातरम’ के उस मंत्र का पुनर्जागरण था जिसने भारत की आजादी की नींव रखी थी। सेना के ‘मौन योद्धाओं’ के संघर्ष से लेकर ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की कूटनीतिक जीत तक, भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों को थामे हुए आधुनिकता के आकाश को छूने के लिए तैयार है।
एक विचारोत्तेजक प्रश्न: क्या 2026 की यह परेड केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन थी, या यह वैश्विक व्यवस्था में भारत के एक ‘विश्व-मित्र’ और ‘शक्तिशाली गणराज्य’ के रूप में पूर्ण उदय का घोषणापत्र है?
